मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपः मानसमुच्यते॥
मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्मसंयम और भावों की शुद्धता — यह सब मानसिक तप कहलाता है।
Serenity of mind, gentleness, silence, self-control, and purity of heart — these are called austerities of the mind.